परिद्‍श्य

भारत विकासशील देश से विकसित देश की ओर अग्रसर हो रहा है | तेजी से बदलते इस परिवेश ने आर्थिक ओर सामाजिक ढांचे को बदला है ओर अब यह शहरी विकास के साथ-साथ नई तकनीको से ग्रामीण क्षेत्रो में भी तेजी से परिवर्तन आ रहा है | भारत के समग्र विकास के लिए यह आवश्यक है कि यह परिवर्तन सतत रफ्तार से आगे बढ़ता जाए व ग्रामीण क्षेत्र भी शहरी क्षेत्रो के साथ समग्र रुप से विकसित करे |

भारत की 80 प्रतिशत आबादी गाँवो मे निवास करती है, जहाँ पर अपार प्राकृतिक संसाधान है और जिसके श्रम से पैदा की गई खाद्य संपदा पर शहरी रफ्तार और विकास निर्भर है | सूचना क्रांति के इस दौर मे समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव नहीं हैं | हमारे पुर्व राष्ट्रपति महामहिम Dr. APJ Abdul Kalam ने अपने पुरा (PURA) के सिध्दांत मे उल्लेख किया हैं कि "शहरी विकास एवम्‌ सुविधाओ को ग्रामीण क्षेत्रों मे ले जाना विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं |"

बदलते भारत की इस तस्वीर में ग्रामीण क्षेत्रों मे तकनीकी, शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक विकास व बुनियादी सुविधाओ को पहुँचाना बहुत आवश्यक हैं और केन्द्र सरकार, राज्या सरकार व देश की अनेक बड़ी व्यवसायिक संस्थाओ ने ग्रामीण क्षेत्रों मे विकास के कार्यो को गति देने के लिए निश्चित कार्यक्रम तैयार किये हैं, ताकि इस समग्र विकास यात्रा मे शामिल होकर भारत को विकासशील देश से विकसित देशो की श्रेणी मे ले जाए | इसलिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक ग्रामीण भी इस महायज्ञ मे अपने ज्ञान अर्जन से आहुति दे और विकास से उत्पन्न हुए अवसरो का पुर्ण लाभ लेकर हो रहे सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन के इस महायज्ञ मे शामिल हो |
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